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पढ़े हिन्दू नववर्ष का वैज्ञानिक और ऐतिहासिक महत्त्व


चैत्र नवरात्र के पहले दिन से वैदिक नववर्ष की शुरूआत होती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र 18 मार्च से प्रारम्भ हो रहे हैं। जबकि पहली जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष अंग्रेजी नववर्ष है। हमारे देश मे एक वर्ग ऐसा हैं जो पश्चिम से प्रभावित रहता हैं उन्हें हम भारतीय पिछड़े लगते हैं वो लोग ईसाई नववर्ष को ऐसे महिमामंडित करते हैं जैसे ये नववर्ष ना होता तो हम आदिम युग में जी रहे होते। देखिये विरोध हम भी नहीं कर रहे हैं आपको मनाना हैं मनाइये कौन रोक रहा हैं मगर आप हमारे हिन्दू नववर्ष को अपने कुतर्को से अपमानित करने का प्रयास करेंगे तो यह हम नहीं होने देंगे। अगर आपको लगता हैं इसाई नववर्ष श्रेष्ठ हैं तो आइये आज हिन्दू और इसाई नववर्ष को वैज्ञानिक कसौटी पर परखते हैं।

वैज्ञानिक कसौटी पर वैदिक नववर्ष

इसवी सन गणना का आकाशीय पिंडो और ऋतुओ से कोई सम्बन्ध नहीं हैं इन्हें एक के बाद दो और दो के बाद तीन – इस गणना का ही ध्यान रहता हैं। रविवार के सोमवार क्यों आता हैं मंगलवार क्यों नहीं आता इसका इनको कोई ज्ञान नहीं पर भारतीय ज्योतिष का विद्यार्थी यह सभी गूढ़ रहस्य जानता हैं क्योकि वारो का नामकरण भारतीय ज्योतिषयो ने ग्रहों के आधार पर उनके परिक्रमा पथ व प्रभाव को देख कर किया।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरार जी देसाई पर इसवी सन के हिसाब से जन्मदिन मनाने पर मुसीबत ही टूट पड़ी क्योकि उनका जन्म 29 फरवरी को हुआ था और 29 फरवरी वापस आने के लिए उनको तीन वर्ष तक इन्तजार करना पड़ता था। क्योकि इसवी सन 365 दिन 5 घंटे 52 मिनट और 45 सेकेण्ड का होता हैं सो तीन वर्ष तक तो प्रतिवर्ष 365 दिन का माना जाएगा पर चौथे वर्ष फरवरी महीने को 29वी तारीख बढ़ा कर 366 दिन का मान लिया जाता हैं। अब गणित के इस झमेले को भी देखे कि क्या 5 घंटे 52 मिनट और 45 सेकेण्ड को चार से गुणा करने पर 24 घंटे का एक दिन बन पायेगा? नहीं इसमें उनकी ही गणना से सवा सात मिनट का अंतर रहेगा। इस कमी के कारण इसवी सन गणना आगे पीछे चलती रहती हैं।

हमारी तिथिया वैदिक विज्ञान -आकाशीय गणनाओ पर आधारित हैं हम डंके की चोट पर कह सकते हैं की अमावस्या को ही सूर्यग्रहण होगा और पूर्णिमा को ही चंद्रग्रहण होगा आगे पीछे नहीं, क्या ऐसा कोई दावा इसवी सन मानने वाला कर सकता हैं। हमारे ज्योतिषी आकाश में चंद्रमा को देखकर तिथि और माह बता सकते हैं क्या कोई व्यक्ति आकाश देख कर ये बता सकता हैं की आज अंग्रजी महीने की अमुक तारीख और महीना होना चाहिए। क्या कोई अंग्रेजी तारीख के हिसाब से ये बता सकता हैं की समुन्द्र में ज्वार-भाटा कौन कौन सी तारीख को आएगा ?

भारतीय संवत गणना में तीसरे वर्ष अधिमास आता हैं। इस वैज्ञानिक तरीके से ऋतुओ का शुद्धिकरण हो जाता हैं। आज हजारो हजारो वर्ष हो गए परन्तु वसंत ऋतु हमारे चैत्र और वैसाख में ही वृक्षों में नव पल्लव को अंकुरित करेगा। ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में ही सूर्य तपेगा। श्रावण और भादो में ही वर्षा होगी, मार्गशीर्ष और पौष मास में ही कडकडाती ठण्ड पड़ेगी। माघ और फाल्गुन में ही पतझड़ प्रारम्भ होगी। ऋतुओ का इतनी वैज्ञानिक सूझ बुझ कही नहीं हैं। हमारी तिथि वृद्धि, तिथि क्षय अप्रमाणिक होते तो प्रकृति कभी हमारा साथ नहीं देती।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व

- सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रम संवत का पहला दिन प्रारम्भ होता है।
- विक्रमा दित्य ने राजा महाकाल की नगरी उज्जैन में मध्यप्रदेश में यह संवत पर्व शिप्रा नदी तट पर मनाया था।   - इसी दिन लगभग 1960853119 वर्ष पूर्व सूर्योदय के साथ ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारम्भ की।
- प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था।
- स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना। 
- युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ।

कैसे मनाएं वैदिक नववर्ष

वेद आदि शास्त्रों के स्वध्याय का संकल्प लें। घरों एवं धार्मिक स्थलों पर हवन यज्ञ आदि का आयोजन करें। हिंदू नववर्ष के बारे में लोगों को बताएं। एक दूसरे को हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं दें। घरों में मां लक्ष्मी, मां काली व मां सरस्वती का पूजन करें।

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टिप्पणियाँ

  1. अंग्रेजी तारीख में शुक्ल पक्ष,कृष्णा पक्ष बता ही नही सकते.....
    जब हिन्दू कलेंडर में अमावस्या और पुर्णिमा तिथि से शुक्ल,कृष्णा पक्ष का पता चल जाता है।

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