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पत्रकारिता के शर्मनाक किस्से : राजदीप सरदेसाई ने प्रशांत पटेल की FIR वाली ट्वीट में आम आदमी पार्टी के अंकित लाल को क्यो किया टैग

Photo credit -Google
पत्रकार राजदीप सरदेसाई आजकल फिर सुर्खियों में हैं, वैसे तो पत्रकार का कार्य होता हैं कि देश मे चल रही घटनाओं को सुर्खियों में लाना पर ये महोदय अकसर गलत कारणों से खुद ही सुर्खियां बन जाते हैं। ताजा मामला जुड़ा है प्रशांत पटेल से उनकी तकरार को लेकर, आपको बता दूँ की प्रशांत पटेल वही हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी के 20 विधायको को चुनाव आयोग से disqualify करवाया था। मामला यह हैं कि प्रशांत पटेल के एक ट्वीट से नाराज होकर राजदीप सरदेसाई ने उनके खिलाफ FIR करवाई हैं, और ट्विटर पर FIR की कॉपी देते हुए अपनी ट्वीट में आम आदमी पार्टी के मीडिया प्रभारी अंकित लाल को भी टैग किया। इसमें मज़े की बात यह है कि प्रशांत पटेल के जिन ट्वीट से राजदीप सरदेसाई को आपत्ति है वह काफी पुराने है और शायद उनकी चर्चा भी नहीं होती, पर सरदेसाई साहब का दर्द निकल कर तब आया जो प्रशांत ने आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका दे दिया।

आम आदमी पार्टी से राजदीप की नजदीकियां जगजाहिर हैं पिछले वर्ष तगड़ी अफवाह थी कि राजदीप सरदेसाई गोवा से आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी हो सकते हैं, यहाँ तक कि वह गोवा में अरविंद केजरीवाल की रैली में सम्मलित भी हुए थे। शायद इन्ही नजदीकियों की वजह से वो आम आदमी पार्टी को फेवर देने के लिए प्रशांत पटेल के खिलाफ FIR दर्ज करवाये हो।

खैर पूरा मामला यह हैं कि जब 2012 में कांग्रेस शासित आसाम के कोकराझार में दंगे हो रहे थे तब कुछ लोगो ने राजदीप की चुप्पी को ले कर सवाल उठाया तब राजदीप ने यह असंवेदनशील ट्वीट किया।

क्या दंगे की रिपोटिंग मारे गए लोगो की गिनती से की जाएगी, क्या इंसानी मौत की खबर TRP के नज़रिए से तौलनी चाहिये? और इनकी उसी ट्वीट को आधार बनाकर एक वेबसाइट ने लिखा था कि 1 हजार हिन्दुओ के मारे जाने पर राजदीप सरदेसाई असम दंगो की रिपोर्टिंग करेंगे जिसे प्रशांत पटेल ने कोट किया था। यह खबर One india hindi (क्लिक करके पढ़े) की वेबसाइट पर भी छपी हैं जिसे अजय मोहन ने लिखा हैं। तो क्या राजदीप सरदेसाई उनके खिलाफ भी FIR करेंगे? और सबसे बड़ी बात क्या राजदीप सरदेसाई के पास FIR करने की नैतिकता हैं? यह महोदय खुद गुजरात दंगों के समय हिन्दु-मुस्लिम समुदाय की पहचान करते हुए रिपोर्टिंग की थी, परिणाम स्वरूप गुजरात के गांवों तक दंगा फैल गया था। गुजरात दंगे के दौरान राजदीप सरदेसाई की रिपोर्टिंग ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तय सभी मानकों को ध्वस्त कर दिया और अपनी रिपोर्ट में लगातार दंगाईयों व पीडि़तों की धार्मिक पहचान उजागर करते रहे, जिससे दंगा और भड़का। राजदीप को इस रिपोर्टिंग के लिए कांग्रेस की केंद्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2008 में पद्म पुरस्कार से नवाजा था।

यहाँ तक कि 1993 मुम्बई बम ब्लास्ट, जिसमें 257 लोगो की जान गई थी उसके बाद राजदीप ने अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख लिख कर ब्लास्ट के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम को महिमामंडित करते हुए उसे राष्ट्रभक्त बताया था, यह भी हिन्दुओ को नीचा दिखाने का प्रयास था और राजदीप के इस लेख को कोट करके वामपंथी सांसद सोमनाथ चटर्जी ने संसद में 1993 के दंगों के लिए हिन्दुओ को जिम्मेदार बताया था।

गौरतलब हैं राजदीप सरदेसाई कि अपनी पसन्द के राजनैतिक दलों को मदद करने में पत्रकारिता की गरिमा तक का ख्याल नही करते, खबरे छुपाना अपनी पसन्द के राजनैतिक दलों के हित के हिसाब से खबरों को ट्विस्ट करना इनकी पुरानी आदत रही हैं। यहाँ तक कि ये ट्विटर पर भी सनसनी फैलाने और झूठी खबरें ट्वीट करने से बाज नही आते।

हफ्ते भर पहले जब पूरा देश कासगंज में चंदन गुप्ता की हत्या से दुखी और नाराज़ था तब राजदीप सरदेसाई ने  AAP समर्थित वेबसाइट "जनता का रिपोर्टर" के रिफत जावेद की झूठी खबर को कोट कर के चन्दन के परिवार के खिलाफ ही अफवाह फैलाने की नाकाम कोशिश की थी, जो आप नीचे लगी ट्वीट में देख सकते हैं।

हिन्दुओ के खिलाफ इनकी घृणा का आलम ऐसा हैं कि हिन्दुओ पर अत्याचार से जुड़ी कोई खबर लिखने पर ये पत्रकारो को ही नसीहत देने लगते हैं। वह तो भला हो ANI की पत्रकार  स्मिता प्रकाश का जिन्होंने राजदीप के झूठ का गुब्बारा चंद घण्टो में फोड़ दिया और राजदीप को माफी मांग कर ट्वीट डिलीट करना पड़ा और यह पहली बार की बात नही हैं झूठी खबरें फैला कर के माहौल खराब करना और फिर बाद में माफी मांग कर ट्वीट डिलीट करना राजदीप की पुरानी आदत रही हैं।


बिना तथ्यो की पड़ताल किये ट्वीट करने पर राजदीप के खिलाफ FIR नही होनी चाहिये?

ये कितने ईमानदार और गम्भीर पत्रकार हैं इसका पता ऐसे चलता हैं कि, चाहे 84 के दंगे हो या 1993 का बम ब्लास्ट हो ...चाहे हाशिमपुरा मेरठ के दंगे हो या भागलपुर कोकराझार के, राजदीप को याद नहीं आते पर उनके हर ट्वीट में गुजरात 2002 कर दंगे झलकते है, क्योंकि यह इनके narattive को सूट करता हैं।


Cash on Vote का स्टिंग आपरेशन : 

यह बहुचर्चित कांड जनता कैसे भूल सकती हैं, अमेरिका के साथ परमाणु करार पर वामपंथी पार्टियों के समर्थन खींच लेने के कारण मनमोहन सिंह सरकार अल्पमत में आ गयी थी। तब सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और अमर सिंह ने बीजेपी सांसदों को वोट के बदले खरीदने की कोशिश की थी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने IBN7 के साथ मिलकर इसका स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमे राजदीप ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बाद में राजदीप सरदेसाई स्टिंग ऑपरेशन की सीडी टीवी पर दिखाने से मुकर गए और भाजपा सांसदों ने हारकर अमर सिंह-मुलायम सिंह एंड पार्टी द्वारा दिये गये एक करोड़ रुपये को संसद में लहराना पड़ा था। इस कांड के लिए मीडिया के इनके ही साथियो का मीडिया स्टडी ग्रुप ने इन्हें दोषी माना था, और प्रसारण नियमावली के उल्लंघन का दोषी पाया था।

सलेक्टिव पत्रकारिता का नमूना देखिये 

2015 में नोएडा के दादरी में एक अखलाक  की हत्या हुई थी बीफ को लेकर ..पहले तो पत्रकार महोदय यह साबित करने में लगे थे कि वहाँ बीफ जैसा कुछ नहीं था, पर जब फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि बीफ था तो उनका ये ट्वीट आया, और दूसरा ट्वीट कासगंज में चन्दन गुप्ता की हत्या के समय का हैं। हत्या के दो मामले और दोनो पर अलग अलग राय, जबकि बीफ ban है और 26 जनवरी पर तिरंगा यात्रा जायज़।

हरि कथा की तरह राजदीप सरदेसाई की भी अनन्त कथाएँ हैं, इनके सारे कांड एक ब्लॉग में आ जाये यह सम्भव ही नही हैं, अगर यह पोस्ट आप लोगो को पसन्द आएगी तो जल्द इसका दूसरा भाग भी लायेंगे पर इसके लिए आपको कमेंट सेक्सन में जाकर हमसे दूसरे भाग के लिए कहना होगा

इस पोस्ट का दूसरा भाग पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करे

राजदीप सरदेसाई की पत्रकारिता के शर्मनाक किस्से भाग-2

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टिप्पणियाँ

  1. बहुत जोरदार,,����तथ्यसहित बेबाकी से Mr.2002 की पोल खोली।आगे के पार्ट के लिए इंतजार में। ����

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    उत्तर
    1. जल्द ही दूसरा भाग लेकर आयेंगे, पत्रकारिता की इस कलंक कथा का।

      हटाएं

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