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महिला दिवस पर विशेष : भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान

आज महिला दिवस पर मैं भारतीय संस्कृति में नारी का उल्लेख किस प्रकार किया गया हैं इस पर चर्चा करना चाहूँगी, क्योंकि भारतीय धर्मग्रन्थों के उद्धरण देकर वामपन्थी विचारधारा वाले हिन्दू धर्म को स्त्री विरोधी साबित करने का प्रयास करते रहते हैं इसलिए आज यह पूरा लेख इस पर आधारित रहेगा कि हिन्दू धर्मग्रन्थ में स्त्रियों के विषय मे क्या कहा गया हैं।  भारतीय संस्कृति में नारी को जगत्-जननी आदि शक्ति-स्वरूपा के रूप में किया गया है और श्रुतियों, स्मृतियों और पुराणों में नारी को विशेष स्थान मिला है, लेकिन वामपन्थी लोग सबसे ज्यादा मनुस्मृति को कोट करते हैं और कहते हैं यह ग्रन्थ स्त्री विरोधी हैं, आइये जानते हैं कि मनुस्मृति में स्त्रियों के लिए क्या कहा गया हैं। मनुस्मृति के सबसे पहले यह पाँच श्लोक देखिये। (मनुस्मृति अध्याय ३, श्लोक ५६-६०) : यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।५६।। [यत्र तु नार्यः पूज्यन्ते तत्र देवताः रमन्ते, यत्र तु एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति) ।] जहां स्त्रीजाति का आदर-स...

Staff Selection Commission OR Slow Service Commission : कर्मचारी चयन आयोग का असली सच

कर्मचारी चयन आयोग देश में विभिन्न पदों भर्तियाँ निकालता है जिनमें SSC-CHSL, SSC-CGL और SSC-CPO प्रमुख रूप से हैं। इनमें से वार्षिक रूप से सभी के लिए परीक्षायें आयोजित की जाती हैं। परीक्षाओं का आलम ये है कि लगभग हर परीक्षा केवल एक बार में पूरी नहीं हो पाती। कहीं ना कहीं तकनीकी समस्या, घोटाला, नकल आदि की घटनाएं सुनने में आती हैं जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी जाती है। छात्रों की समस्या यहीं नहीं खत्म होती, दोबारा परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद भी सिलेक्शन होने तक की प्रक्रिया कम से कम 2 साल ले लेती है उसके बाद भी उनकी समस्या कम नहीं होती जॉइनिंग लेटर करीब 1-2 साल बाद ही आता है। ऐसे में SSC से उसके सुस्त रवैये के कारण सवाल पूछे जाने लाजमी हैं। हजारों छात्र एसएससी हेड ऑफिस के बाहर कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इतने दिनों के बावजूद उनकी मांगे सुनने वाला कोई नहीं है। ज्यादातर नेता विपक्षी पार्टियों के ही छात्रों से मिलने आये लेकिन उनको छात्रों की मांगों से कोई लेना देना नहीं वो तो बस अपने राजनैतिक लाभ के लिए आये हैं। हालांकि आज अन्ना हजारे जी के आन्दोलन ज्वाइन करने क...

त्रिपुरा जीत पर बधाई ! किन्तु, तुम भूल न जाना उनको

6 अगस्त, 1999 की सुबह उत्तरी त्रिपुरा के धोलाई जनपद के कंचनछेड़ा नामक स्थान से रा.स्व.संघ के 4 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया गया था। दो वर्ष बाद उनकी निर्मम हत्या की खबर मिली थी। पूर्वांचल के क्षेत्र कार्यवाह श्री श्यामल कांति सेनगुप्ता (आयु 67 वर्ष), दक्षिण असम प्रांत के प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री दीनेन्द्र नाथ डे (आयु 51 वर्ष), अगरतला के विभाग प्रचारक श्री सुधामय दत्त (आयु 51 वर्ष) एवं उत्तर त्रिपुरा के प्रचारक श्री शुभंकर चक्रवर्ती (आयु 37 वर्ष) का उस समय अपहरण कर लिया गया था जब वे कंचनछेड़ा के वनवासी कल्याण आश्रम के छात्रावास में आयोजित बैठक में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए थे। 11 अगस्त को अपहरण की जिम्मेदारी लेते हुए त्रिपुरा के अलगाववादी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट आफ त्रिपुरा ने मांग की थी कि त्रिपुरा सरकार त्रिपुरा स्टेट रायफल्स (टी.एस.आर.) को भंग कर दे, तभी इनकी रिहाई होगी। देखते-देखते एक वर्ष बीत गया, संघ के स्वयंसेवकों का क्षोभ बढ़ता रहा, पर त्रिपुरा और केंद्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए गए। इस क्षोभ का प्रक...

बुरा न मानो होली है

होली का त्यौहार है, फागुन की बयार है, मन मस्तिष्क सब तैयार है बशर्ते आपको भी थोडा प्यार है फिर देर कैसी, छंद बद्ध जोगीरा लोकगीत सुनने के लिए एकदम माफिक मौसम भी है और दस्तूर भी .. बस आपको हर छंद के अंत में "जोगीरा सा रा रा रा" जोड़ना है और कटाक्ष का मजा लेना है ... भारत देखा भारतीय देखे, समझ सके न ट्रूडो। खालिस्तान का नाम लिया, तो खेलोगे फिर लूडो।। रोहित बमूला पर जो अतिदुःखी थे फिर देख सके न सच। दलित दलित जो चिल्लाते थे, अब नहीं रहे राष्ट्रपति पच। गुजराज में जनेऊ था पहना, नार्थ ईस्ट गए चर्च। राहुल गांधी ही कांग्रेस का रोज खोद रहे हैं गर्त। अध्यक्ष बनाया पार्टी सौंपी, चच्चू गए थाईलैंड ट्रिप। अक्ल का इंजन स्टार्ट हुआ न, रहे खूब मारते किक।। झालर जैसी कलगी पाली, इंग्लिश भौंकी खूब। जनता पर बिल्कुल न समझी, रही ऊब की ऊब।। फेयर एंड लवली सर पर धारण, चेरी ब्लॉसम फेस। मानहानि पर आशुतोष83बी खोल के बैठे केस।। सुबह शाम थे सब्जी लाये, सुबह शाम ही दूध। कविवर की राज्यसभा में, सीधा गुप्ता गए हैं कूद।। LG झूठे बीजेप...

पढ़िए राफेल विमान सौदे पर उठ रहे विवाद में कितनी सच्चाई हैं?

राफेल सौदे को घोटाला बताने वालों और कांग्रेस की मानसिकता पर प्रकाश डालते हुए इस सौदे से जुड़ी तथ्यात्मक जानकारी मैं आपसे साझा करना चाहता हूँ और आप सभी से उम्मीद करता हूँ कि इसे लेख का लिंक सभी सोशल साइट्स पर अपने मित्रों से आप लोग साझा करेंगे। राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार राफेल सौदे पर कीमत बढोत्तरी को मुद्दा बनाकर देश को मूर्ख बनाने की साजिश हमेशा की तरह कर रहे हैं, लेकिन यह अचंभित करने वाला कृत्य है क्योंकि यदि वास्तविक कीमत और स्पेशिफिकेशन आदि बताई गई विमान की तो दुश्मन आसानी से जान लेगा की विमान के बेसिक माडल मे क्या क्या अतिरिक्त तकनीकी, उपकरण और विमान मे कैसे हथियार लगे हैं। रक्षा सौदों से जुड़ी जानकारियां हमेशा क्लासिफाइड होती हैं और इसकी गोपनीयता भंग होने पर देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती हैं इसी वजह से यूपीए सरकार ने भी पहले कभी इस तरह की जानकारियां सार्वजनिक नही की हैं, और संसद में तत्कालीन रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी इसे सार्वजनिक करने से मना किया था।       सबसे अहम बात हैं कि रक्षा सौदे की जानकारी उजागर होने से देश की युद्ध नीति खोखली होती है यह 60...

चन्द्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी मां की कहानी जिसे पढ़कर हर भारतीय का सर शर्म से झुक जायेगा

आज 27 फरवरी का दिन है। चन्द्रशेखर आजाद जी की आज पुण्यतिथि हैं। चंद्रशेखर आजाद का नाम असल में चंद्रशेखर तिवारी था लेकिन बाद में इन्होंने खुद को आजाद घोषित कर दिया था और कभी अंग्रेजों के हाथो ना मरने की कसम खाई थी। पंडित सीताराम तिवारी उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बदर गांव के रहने वाले थे। लेकिन भीषण अकाल के चलते वे मध्यप्रदेश के ग्राम भाबरा में जा बसे थे। जी हां 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के भाबरा गांव में ही सीताराम तिवारी और जगरानी देवी के घर एक बच्चा पैदा हुआ था। नाम रखा गया चंद्रशेखर तिवारी। जैसा कि इन्होंने कभी भी अग्रेंजों के हाथों ना मरने की कसम खाई थी वैसा ही इन्होंने किया भी। 27 फरवरी, 1931 को जब इलाहाबाद के एलफ्रेड पार्क में इन्हें अग्रेजों ने घेर लिया था तो काफी देर तक ये अकेले उनका मुकाबला करते रहे लेकिन जब अंत में उनके पास केवल एक गोली बची थी तो उन्होंने खुद को गोली मार ली थी। आज आपको चन्द्रशेखर आजाद की वह कहानी हम बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आपको क्षोभ होगा, और शर्म से आपकी आंखें...

सारागढ़ी का ऐतिहासिक युद्ध जब 12 हजार अफगानियों को 21 सिक्खों ने चटाई धूल

मेरा मानना हैं इतिहास हमेशा से ही प्रेरणादायी होता है, इतिहास सिर्फ पढ़ने का विषय नहीं हैं यह भूतकाल के अनुभवो की किताब हैं इससे हम सभी को अनुभव का सबक लेना चाहिए, लेकिन आज में जिक्र कर रहा हूँ एक ऐसी भारतीय वीरो की अविस्मरणीय शौर्य गाथा की जो बैटल ऑफ़ सारागढ़ी के नाम से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। भारत भूमि पर अनेक युद्ध लड़े गए चाहे वह महाराणा प्रताप का मुगलो के विरुद्ध लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध हो या छत्रपति शिवाजी महाराज का मुस्लिम आक्रांताओ के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष, ऐसी ही एक अदम्य साहस की गाथा है सारागढ़ी का युद्ध जो की सन् 1897 में लड़ा गया सारागढ़ी एक छोटा सा गाँव जो की तत्कालीन भारत की नार्थ वेस्ट फ्रंटियर पर स्थित था, और वर्तमान में पाकिस्तान में है।   एक तरफ 12 हजार अफगान सैनिक तो दूसरी तरफ 21 सिख अगर आप को इसके बारे नहीं पता तो आप अपने इतिहास से बेखबर है। आपने "ग्रीक सपार्टा" और "परसियन" की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा, इनके ऊपर "300" जैसी फिल्म भी बनी है, पर अगर आप "सारागढ़ी" के बारे में पढ़ेंगे तो पता चलेगा इससे महान लड़ाई भारत की भ...